समुंदर का पानी खारा क्यु

 एक बार दो भाई थे एक अमीर दूसरा गरीब अमीर तो अपने मस्ती से रहता था गरीब तो टाइम पास करके दिन गुराता था एक दिन दिवाली की बात थी जब वह माउष हो कर बैठा था तभी एक परी परगट हुई उसने कहा तुम उदास क्यों बैठे हो तो गरीब ने अपना हाल सुनाया तबि वह परी ने कहा बस इतनी सी बात पर उदास हो गरीब बोला आप को इतनी सी बात लगती है वहा देखो मेरा भाई कितने मौज से दिन बिता रहा है अपने परिवार के साथ मेरा परिवार कितना उदास है तभी परी ने एक चकी पर्गट् की  उस चकि से नमक निकलता था बोली अब मायुष् मत रहा और घर ले जाओ और नमक बेज कर पैसे से अपना और अपने परिवार को खुश रखो तभी वह घर जाके अपने परिवार को बताता है और नमक बेजने का काम शुरू कर देता है वह धीरे धीरे वह अपने भाई से भी अमीर हो गया तो उसके भाई चोचने लगा की क्या मिल गया की वह एक दम मुझ से बी जयादा अमीर हो गया उसने अपने भाई के चोरी चुपके घर मे गया तभी उसने पता लगा की क्या मामला है तो वह चोचने लग गया की क्या किया जाय की वह चकि मुझे मिल जाय फिर कुछ दिनों के बाद वह उसी घर जाता है और वह चकि को चुरा कर ले जाता है घर जाने के बाद वह अपनी पत्नी और बचो को कहता है की हमे अब इस गाँव मे नही रहेगे तुम सब अपना समान पैक कर लो हमे अभी जाना है तो फिर वह उसी समय वहा से निकल पड़ते है और समुंदर के रास्ते से जाते है लेकिन उस की पत्नी ने उसे कहा की हमने क्या किया है की अचानक गाँव छोड़ना पडा तभी उस ने कहा बताउग नही दिखाता हु तभी उसने कहा चकि चकि नमक निकालो तब नमक निकले लगा और रुकने का नाम ही नही ले रहा था नमक निकला रहा क्युकी उसने चकि बद करनी नही आती थी और कुछ समय मे वो और उसका परिवार तालाब मे डूब गया तभी तो समुंदर का पानी खारा होता है

यदि आप को कहानी पसद आये तो स्टोरी को लाइक commant kare दनायवाद

Writter parmod kumar


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